हिंदी से इंग्लिश कैसे सीखें
हिंदी जानना इंग्लिश सीखने में मदद करता है, पर कुछ जगह यही अड़चन भी बनता है। अगर आप जानते हैं कि हिंदी और इंग्लिश कहाँ अलग हैं, तो वही गलतियाँ पहले से पहचान सकते हैं।
हिंदी से शुरुआत करना ठीक है
शुरू में नए शब्द का हिंदी अर्थ जानना और ग्रामर हिंदी में समझना बिल्कुल ठीक है। मुश्किल तब होती है जब हर वाक्य बोलने से पहले मन में हिंदी से ट्रांसलेट करते हैं: बोलना धीमा हो जाता है और वाक्य हिंदी जैसा बनता है।
धीरे-धीरे लक्ष्य यह रखें कि छोटे वाक्य सीधे इंग्लिश में समझ आएँ। इसके लिए सबसे अच्छा है बहुत सारे सही इंग्लिश वाक्य सुनना और लिखना।
हिंदी और इंग्लिश में असली फ़र्क
- वाक्य का क्रम: हिंदी में क्रिया आख़िर में ("मैं चाय पीता हूँ"), इंग्लिश में बीच में ("I drink tea")।
- a, an और the: हिंदी में नहीं होते, इसलिए लिखते समय छूट जाते हैं और सुनते समय भी कम सुनाई देते हैं।
- he और she: हिंदी का "वह" इंग्लिश में दो शब्द है।
- v और w: हिंदी में एक ही "व" है, इंग्लिश में vest और west अलग हैं।
- th: think और this की आवाज़ न "थ" है न "द"; जीभ हल्के से दाँतों के बीच रखकर बोली जाती है।
सुनते समय क्या मुश्किल आता है
हम ज़्यादातर भारतीय उच्चारण वाली इंग्लिश सुनते हैं, जहाँ हर शब्द साफ़ बोला जाता है। ब्रिटिश या अमेरिकन इंग्लिश में छोटे शब्द (to, a, of, and) बहुत हल्के बोले जाते हैं और शब्द आपस में जुड़ जाते हैं। इसलिए फ़िल्म या इंटरव्यू में सब कुछ तेज़ लगता है।
डिक्टेशन ठीक यही कमी पकड़ता है: जो छोटा शब्द आपने नहीं सुना, वह जाँच में दिखता है।
ट्रांसलेट करना कैसे छोड़ें
- पूरे वाक्य याद करें, अलग-अलग शब्द नहीं: "How are you?", "I don't know"।
- सुनकर लिखें: सही वाक्य बार-बार लिखने से ढाँचा याद हो जाता है।
- ज़ोर से दोहराएँ: हर वाक्य सुनकर वैसे ही बोलें।
- हिंदी अर्थ तभी देखें जब सच में समझ न आए।
हिंदी से इंग्लिश सीखने के सवाल
हिंदी से इंग्लिश सीखने का आसान तरीका क्या है?
शुरुआत में हिंदी में समझें, फिर रोज़ छोटे इंग्लिश वाक्य सुनें और लिखें। इससे धीरे-धीरे ट्रांसलेट करने की ज़रूरत कम होती है।
हिंदी बोलने वाले इंग्लिश में सबसे ज़्यादा कौन-सी गलती करते हैं?
a और the छोड़ना, he और she मिलाना, -s भूलना ("she go") और हिंदी के क्रम में वाक्य बनाना।
क्या इंग्लिश को हिंदी में ट्रांसलेट करना सीखना ज़रूरी है?
समझने के लिए शुरू में मदद करता है, पर बोलने और सुनने के लिए लक्ष्य है सीधे इंग्लिश में सोचना। ट्रांसलेशन एक सीढ़ी है, मंज़िल नहीं।